बचपन की बातें आज हमें बहुत कूछ सोचने को मजबूर कर देती हैं। पूरानी बीना फ्रेम की स्लेट, पेम के टूकडे़, बचपन की चवन्नी , नदी मे नहाना , सूबह व स्कूल के बाद खेत पर काम करना, गाय चराना, समय पर स्कूल जाना, मन लगाकर पढना, टिचर की हर बात मानना, स्कूल न आने वाले बच्चो को दूर खेतों से पकडकर लाना, सण्डे को गॉव की एकमात्र टि.वी.पर रामायण देखना, रामायण पात्रों की नकल करना, आेर सुविधा न होने पर भी हर क्लास में प्रथम आना, उस बचपन ओर आज के बचपन में कितना अंतर हो गया है।

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