संदेश

• शिक्षण प्रक्रिया मे प्रश्न पूँछकर उनकी समझ का आकलन करना • बच्चों से सूचना संग्रहण तथा उस पर विचार विमर्श करना। *बच्चों से कहानी को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया । *उसे खेल के माध्यम से सिखाना *प्रोजेक्ट कार्यों में लगाना। *चित्रों के माध्यम से कहानी बनाना। *अवलोकन करवाना आैरअवलोकन को शब्दों में बताने के लिए कहना। *दैनिक जीवन के कार्यों से संबंधित प्रश्न करके भी, उनकी समझ का आकलन किया जा सकता हैं। *उनके परिवार से संबंधित जानकारी या उनकी पसंद के बारे में जानना। *आसपास दिखाई देने वाली वस्तुओं के बारे में बता पा रहे या नही। *छात्रों को सहयोगपूर्ण, उद्देश्यपूर्ण सामूहिक कार्य में लगाकर। *बच्चों को किस क्षेत्र में विशेष सहयोग की आवश्यकता है। ये जानकारियां जान पाना। *कार्य योजना बनाने मे आकलन महत्वपूर्ण है। *बच्चों की उपलब्धि स्तर को ज्ञात करने मे सहायक। *प्रचलित भाषा व घर में बोले जाने वाली भाषा से जान पाना। *स्थानीय भाषा, रीति रिवाजों, त्योहारों, स्थानीय रोजगार, व्यवसाय, के कामों पर चर्चा कर बहुत से प्रश्न किए जा सकते है। *अपनी मातृभाषा में कंकड़ ,बीज गिनना ,दो अलग अलग ढेरों को गिनना आदि। *चित्र पहेली,ब्लॉक बिल्डिंग, पैटर्न मेकिंग,कविता ,पाठ,आदि मातृभाषा में जानकर उनकी ज्ञानात्मक और संख्यात्मक कौशल का आकलन किया जा सकता है। *अनुमान लगाना, आपस में चर्चा करना, खिलौनों के साथ कार्य करने, चित्र बनाना, चित्रों पर अपने विचार व्यक्त करना, ब्लॉक्स द्वारा विभिन्न प्रकार की आकृतियां बनाना, गिनना, वस्तुओं के गुण, रंग, आकार, विशेषताओं के आधार पर व्यवस्थित करना, वर्गीकरण करना, पैटर्न बनाना तथा उनके नियम बनाना आदि कार्यों का अवलोकन करके बच्चों का आकलन कर सकते हैं। *श्रुतलेखन भी आकलन का एक बेहतर तरीका हो सकता है। *घर के लोगों के बारे में बताने के लिए कहेंगे। *स्थानीय भाषा में उनसे बात करके उनके विचार हम जान सकते हैं और उनका आकलन कर सकते हैं। *बच्चों में बिना भय के उत्तर देने अपनी बात रखने के अवसर देकर आकलन कर सकते है। *अभिलेख , जांच सूची, और पोर्टफोलियो द्वारा भी आंकलन कर सकते है। *योग्यता और आयु के अनुरूप कार्य करवाकर इस तरह से उनके सतत विकास का आंकलन किया जाकर एफएलएन 3.0 के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है

भाषा

 पाठ पुस्तक की भाषा और बोली जाने वाली भाषा में ज्यादा अंतर होता है।इसलिए पहले स्कूल की भाषा मे पढ़ाया जाना चाहिए । फिर बच्चों की भाषा मे उसके बारे मे बात करना चाहिए। आैर बच्चों को अपनी भाषा मे बोलने का अवसर देना चाहिए।

FLN ME PERRENT KA SAHYOG MAHTVPURN HOTA HE. MITTING LEKAR FLN KI GATIVIDHI ME SHAMIL KARENGE

शिक्षण विषय उतना कठिन नहीं जितना मैंने सोचा था, खासकर तब जबकि इसे चरणों में विभाजित किया गया हो। और यह बहुत अच्छी बात है। कि बच्चे चरणबद्ध ही सिखते है

शिक्षण विषय उतना कठिन नहीं जितना मैंने सोचा था, खासकर तब जबकि इसे चरणों में विभाजित किया गया हो। और यह बहुत अच्छी बात है। कि बच्चे चरणबद्ध ही सिखते है

बच्चे जिस जगह पर खाते - पीते या रहते हैं उन सभी जगहों या स्थानों को स्वच्छ और साफ सुथरा रखना है उन्हें यह भी बताना होगा कि यह प्रक्रिया सिर्फ एक दिन के नहीं है, यह दिन- प्रतिदिन करना होगा।

शिक्षण स्तर को ध्यान में रखकर ही शिक्षण कार्य कराना जिससे की सभी बच्चें शिक्षार्थी केन्द्रित पद्धति से बच्चे भयमुक्त वातावरण मे सीखते है गतिविधियाँ ,कहानियाँ , खेल गतिविधियाँ,पहेली बूझना, कहानी बनाना ।इन माध्यमों से बच्चों के दक्षता कौशल बढ़ाऐ जाते है।